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📑 In This Chapter Guide (Table of Contents)
1. समास की परिभाषा और मुख्य पद
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नए सार्थक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।
- समस्त पद (सामासिक शब्द): समास के नियमों से बने नए संक्षिप्त शब्द को समस्त पद कहते हैं (जैसे: "राजपुत्र")।
- समास-विग्रह: समस्त पद के सभी पदों को अलग-अलग करके उनके आपसी संबंध को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है (जैसे: "राजा का पुत्र")।
- समास में पहले पद को पूर्वपद तथा दूसरे पद को उत्तरपद कहा जाता है।
2. समास के छह भेद एवं उनकी पहचान
| समास का नाम | पहचान व मुख्य नियम | प्रमुख उदाहरण (विग्रह सहित) |
|---|---|---|
| 1. अव्ययीभाव समास | पहला पद अव्यय (यथा, प्रति, आ, अनु, बे, हर, भर) हो और वही प्रधान हो। | • यथाशक्ति: शक्ति के अनुसार • प्रतिदिन: प्रत्येक दिन • आजन्म: जन्म से लेकर • भरपेट: पेट भरकर |
| 2. तत्पुरुष समास | उत्तरपद प्रधान होता है तथा विग्रह करने पर कारक चिह्नों (को, से, के लिए, का/के/की, में/पर) का लोप होता है। | • गगनचुंबी: गगन को चूमने वाला (कर्म) • हस्तलिखित: हाथ से लिखित (करण) • रसोईघर: रसोई के लिए घर (संप्रदान) • ऋणमुक्त: ऋण से मुक्त (अपादान) • राजमहल: राजा का महल (संबंध) • आपबीती: आप (स्वयं) पर बीती (अधिकरण) |
| 3. कर्मधारय समास | उत्तरपद प्रधान होता है तथा दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध होता है (विग्रह में "है जो" या "के समान" आता है)। | • नीलकमल: नीला है जो कमल • चरणकमल: कमल के समान चरण • महात्मा: महान है जो आत्मा • मुखचंद्र: चंद्रमा के समान मुख |
| 4. द्विगु समास | पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण होता है और समस्त पद किसी समूह या समाहार का बोध कराता है। | • चौराहा: चार राहों का समाहार • त्रिफला: तीन फलों का समाहार • नवरात्र: नौ रातों का समूह • शताब्दी: सौ अब्दों (वर्षों) का समाहार |
| 5. द्वंद्व समास | दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह करने पर बीच में "और, एवं, तथा, या" लगता है। पदों के बीच योजक चिह्न (-) लगा रहता है। | • माता-पिता: माता और पिता • सुख-दुःख: सुख और दुःख • दिन-रात: दिन और रात • दाल-रोटी: दाल और रोटी |
| 6. बहुव्रीहि समास | कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अन्य अर्थ/व्यक्ति की ओर संकेत करते हैं। | • दशानन: दस हैं आनन (मुख) जिसके अर्थात् रावण • लंबोदर: लंबा है उदर जिसका अर्थात् गणेश जी • चतुर्भुज: चार हैं भुजाएं जिनकी अर्थात् भगवान विष्णु • नीलकंठ: नीला है कंठ जिनका अर्थात् शिव जी |
💡 Frequently Asked Questions (FAQ)
❓ कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
कर्मधारय समास में दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध होता है और दूसरा पद मुख्य होता है (जैसे: "महावीर" = महान है जो वीर)। जबकि बहुव्रीहि समास में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अन्य व्यक्ति की ओर संकेत करते हैं (जैसे: "महावीर" = महान वीर हैं जो अर्थात् हनुमान जी)।
❓ द्विगु और बहुव्रीहि समास में "दशानन" किस समास में आएगा?
यदि "दशानन" का विग्रह "दस आननों (सिरों) का समाहार" किया जाए, तो यह संख्यावाचक होने के कारण द्विगु समास होगा। परंतु यदि इसका विग्रह "दस हैं आनन जिसके अर्थात् रावण" किया जाए, तो यह तीसरे व्यक्ति का बोध कराने के कारण बहुव्रीहि समास होगा। बोर्ड परीक्षा में बहुव्रीहि समास को प्राथमिकता दी जाती है।
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